जिले के रेवापुर गांव की श्रीमती कविता चौहान ने मेहनत, हौसले और आत्मविश्वास के बल पर न केवल अपने परिवार को आर्थिक संबल दिया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा की मिसाल कायम की है। आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही कविता के लिए परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण था।
ऐसे समय में संत सेवालाल स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। संत सेवालाल स्व-सहायता समूह की 11 महिलाओं ने एकजुट होकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह की नियमित बचत बढ़ते-बढ़ते 24 हजार रुपये तक पहुंची। इसके साथ ही ग्राम संगठन और बैंक से प्राप्त ऋण ने समूह की आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद की।
कविता चौहान ने समूह के माध्यम से 10 हजार रुपये का ऋण लेकर ऑनलाइन एवं बैंक बी.सी. दुकान शुरू की। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय होने लगी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया और बच्चों की पढ़ाई सहित घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान हुआ। नमो ड्रोन प्रशिक्षण ने बदली जिंदगी कविता की आत्मनिर्भरता की यह यात्रा यहीं नहीं रुकी।
उन्होंने ग्वालियर में आयोजित "नमो ड्रोन" प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ड्रोन संचालन में दक्षता हासिल की और ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में नई पहचान बनाई। कविता ने ड्रोन के माध्यम से 2 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि में कीटनाशक छिड़काव का कार्य किया। इस कार्य से उन्होंने 5.81 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की।
ड्रोन तकनीक ने उन्हें आधुनिक कृषि सेवाओं से जोड़ा और आय का एक नया माध्यम उपलब्ध कराया। आज कविता चौहान अपने परिवार की जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने के साथ-साथ अपने बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे रही हैं। साथ ही वह गांव की अन्य महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
कविता ने आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला योजना और लाड़ली बहना योजना जैसी विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ भी लिया है। कविता चौहान आज रेवापुर गांव की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, नवाचार और हौसले की प्रेरणादायी बन गई है।



