पेटेंट किस काम आता है, कोई नया विचार या शोध अपने नाम पर कैसे दर्ज कराया जाता है और इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया क्या है – बालाघाट के विद्यार्थियों को ये जानकारी सीधे पेटेंट कार्यालय के एक अधिकारी से मिली। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का विषय था – आईपीआर अवेयरनेस फॉर इनोवेशन, रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप। यह आयोजन प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार मराठे के निर्देशन में हुआ। कार्यशाला के संयोजक डॉ. राकेश चौरे ने कार्यक्रम की जानकारी साझा की।

पेटेंट की प्रक्रिया पर सीधा व्याख्यान

विषय विशेषज्ञ के रूप में नागपुर में पदस्थ असिस्टेंट कंट्रोलर, पेटेंट एवं डिजाइन श्री कुमार राजू ने व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को पेटेंट की उपयोगिता, पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी अहम जानकारियां बताईं।

विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए यह जानकारी व्यावहारिक महत्व रखती है। किसी नए उत्पाद, तकनीक या डिजाइन पर अधिकार सुरक्षित रखने के लिए पेटेंट और बौद्धिक संपदा से जुड़े नियमों की समझ जरूरी होती है, और कार्यशाला का पूरा जोर इसी बुनियादी समझ पर रहा।

ऑनलाइन जुड़े करीब 300 विद्यार्थी

कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वहीं महाविद्यालय के लगभग 300 विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला से जुड़े और आईपीआर, पेटेंट तथा नवाचार से जुड़ी जानकारी हासिल की। ऑनलाइन माध्यम की वजह से एक ही सत्र में बड़ी संख्या में विद्यार्थी विशेषज्ञ को सुन सके।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. खिलेश्वर ठाकरे ने विषय विशेषज्ञ और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

आयोजन में महाविद्यालय परिवार का सहयोग

कार्यशाला को सफल बनाने में डॉ. शाजिया तबस्सुम, प्रो. आनंद पारधी, प्रो. मुकेश बिसेन, प्रो. खिलेश्वर ठाकरे, प्रो. ऋषभ भगत और डॉ. सुप्रिया बिसेन सहित पूरे महाविद्यालय परिवार का सहयोग रहा।

आईपीआर और पेटेंट से जुड़े ऐसे सत्रों में रुचि रखने वाले विद्यार्थी अपने विभाग या महाविद्यालय के संबंधित प्राध्यापकों से आगे की जानकारी ले सकते हैं।